Jump to ratings and reviews
Rate this book

पहला पाठ

Rate this book
पहला पाठ पहला पाठ भीष्म साहनी का पहला कहानी-संग्रह है जो 1957 में प्रकाशित हुआ था। कहानी 'चीफ की दावत' जो उस समय बहुत चर्चित हुई थी, अपनी संवेदना और कथ्य की सामयिकता की वजह से आज भी उतनी ही पठनीय है। चन्द्रधर शर्मा गुलेरी की कहानी 'उसने कहा था' की तरह भीष्मजी की कई कहानियाँ मील का पत्थर हैं। 'इंद्रजाल', 'पटरियाँ', 'अमृतसर आ गया है', 'ओ हरामज़ादे' आदि कहानियों के रचियता साहनी का कथा-संसार समृद्ध एवं व्यापक है। जीवन के विविध पहलुओं एवं भंगिमाओं को सहजता से रच वह मर्म को छू लेते हैं। सामाजिक प्रतिबद्धता के नाम पर नीरस और उपदेशात्मक रचनाएँ उन्होंने नहीं दीं। प्रगतिशील आन्दोलन से सक्रिय रूप से जुड़े होने के बावजूद भी निरन्तर वह नारेबाजी से स्वयं को बचाये रहे। उनकी कहानियों में सोद्देश्यता है, करुणा है, व्यंग्य है; और अन्तरंगता है। कला की सामाजिक प्रतिबद्धता को यथोचित मान देने वाले कथाकारों में भीष्म साहनी का नाम अग्रगण्य है। पहला पाठ की कहानियों का नया संस्करण करने के पीछे हमारा मन्तव्य उनकी कहानियों में पाठक की निरन्तर रुचि एवं माँग को पूरा करने का है।

104 pages, Hardcover

First published January 1, 2000

1 person is currently reading
18 people want to read

About the author

Bhisham Sahni

82 books90 followers

Ratings & Reviews

What do you think?
Rate this book

Friends & Following

Create a free account to discover what your friends think of this book!

Community Reviews

5 stars
1 (12%)
4 stars
3 (37%)
3 stars
3 (37%)
2 stars
1 (12%)
1 star
0 (0%)
Displaying 1 - 2 of 2 reviews
Profile Image for Goldi Tewari.
Author 1 book3 followers
January 17, 2025
भीष्म साहनी जी की कहानी संग्रह - 'पहला पाठ' एक चक्षु-उन्मीलक यानि eye-opener संग्रह है। इसे पढ़ने के बाद आपका जीवन को देखने का नजरिया थोड़ा तो बदल ही जाएगा। मेरा भी कुछ बदला क्योंकि मानव के छिपे हुए गहरे राज और अद्भुत प्रवित्तियाँ इस संग्रह में देखने और समझने को मिलती है। बहुत बार ऐसा लगता है जैसे अपनी ही किसी अजीब आदत और विचार के बारे में पढ़ रहे है। हर कहानी को एकदम रस ले-लेकर मैंने पढ़ा और कुछ को तो बार-बार पढ़ा। मेरी सबसे प्रिय कहानी थी ‘ललिता’ जिसने मुझे एक प्रचलित अंग्रेजी धारावाहिक Breaking bad की याद दिला दी। इस संग्रह में से दो कहानियों का सार मैं यहाँ लिख रहीं हूँ।

‘छिपे चित्र’ में हरिसिंह की कहानी विचित्र पर वास्तविक लगी। यह कहानी सपनों के असाध्य होने के कारण उनको काल्पनिक तौर पर पूरा करने की कोशिश दर्शाती है।मनोविज्ञान की भाषा में इस प्रवृत्ति को wishful thinking, vicarious satisfaction, identification, Fantasy compensation इत्यादि कहेंगे। हरिसिंह की कहानी एक स्पष्ट उदाहरण है कि कैसे कोई इच्छाकल्पित जीवन में प्रवेश करता है। एक बड़े बंगले में नौकर के रूप में काम करके, स्वयं को मालिक मान घर के दूसरे नौकरों पर धौंस जमाकर, रामलीला में राजा दशरथ का किरदार निभाकर हरिसिंह अपने सपनों की दुनिया को अनुभव कर सकता है और उसके करीब हो सकता है, भले ही वह सीधे उसे प्राप्त न कर सके। इससे उन्हें अपनी भूमिका में कुछ हद तक संतोष और पूर्ति का अनुभव होता है, भले ही उनकी वास्तविकता और उनकी महत्वाकांक्षाओं के बीच बहुत सारा अंतर है।

अंतिम कहानी, ‘फूलां’ बिल्ली और इंसान के गहरे सम्बन्ध को दर्शाती है। फूलां की मांणों के खो जाने के बाद फूलां की व्यथा में हास्य भी नजर आया और संजीदगी भी। मेरे ऐसी कुछ जानने वाले है जिन्हें बिल्ली-कुत्ते पलना बेहद पसंद है और उनसे मन लगा बैठते है। पर मेरी कभी समझ नहीं आया कि ऐसा क्यों है कि वो उनके बगैर नहीं जी पाते। ये कहानी पढ़कर थोड़ा एहसास हुआ कि शायद घर के अकेलेपन के साथी होते है ये पालतू जानवर। फूलां और उसके पति के उलझे हुए दाम्पत्य जीवन और दबी-छिपी हुई आकांक्षाये भी मांणों के खो जाने के बाद देखने को मिलतीं है।

इस किताब की मेरी सबसे पसंदीदा पंक्तियाँ है:
“सायंकाल की बढ़ती छाया और मनुष्य के बीते दिनों में एक अनूठा सम्बन्ध है। ज्यों ही रात के साए अपना अँधियारा आँचल फैलाए सृष्टि पर उतरने लगते हैं, अतीत की स्मृतियाँ जाग उठती हैं। बुझी हुई आशाएँ, भूले हुए दिन, विस्मृत सौन्दर्य और संगीत-एक-एक करके सभी हाथ पसारे अपनी अकाल मृत्यु को न मानते हुए मन की अतल गहराइयों में से उठने लगते हैं, और मनुष्य का मन एक गहरे विषाद और अनुराग में डूबने-उतराने लगता है। शायद इसीलिए समझदार, क्रियाशील लोग शाम के वक्त घरों में नहीं बैठते, बाहर निकल जाते हैं, ताकि अतीत के इस विकट साक्षात् से बचे रहें।” (‘अकाल मृत्यु’ कहानी से।)

हिंदी पाठकों और प्रेमियों से मेरा अनुरोध है काम से कम एक बार इस कहानी संग्रह - पहला पाठ को जरूर पढ़े और औरो को भी पढ़ने की प्रेरणा दें।
Profile Image for Rahul Waghmare.
227 reviews3 followers
September 22, 2021
फ्योडोर दस्तयेवस्की की अंदाज में लिखी गई लघुकथाये आपको विचार करने को उत्प्रेरीत करती हैं| हर कथा में भीष्म जी ने जीवन के विभिन्न पहलूओंको सादर किया है|
Displaying 1 - 2 of 2 reviews

Can't find what you're looking for?

Get help and learn more about the design.