“परम्परा केवल वही मुख्य नहीं है जिसकी रचना बाहर हो रही है, कुछ वह भी प्रधान है जो हमें अपने पुरखों से विरासत के रूप में मिली है, जो निखिल भूमंडल के साहित्य के बीच हमारे अपने साहित्य की विशेषता है और जिसके भीतर से हम अपने हृदय को अपनी जाति के हृदय के साथ आसानी से मिला सकते हैं।”
― रश्मिरथी
― रश्मिरथी
“ऊँच-नीच का भेद न माने, वही श्रेष्ठ ज्ञानी है, दया-धर्म जिसमें हो, सबसे वही पूज्य प्राणी है। क्षत्रिय वही, भरी हो जिसमें निर्भयता की आग, सबसे श्रेष्ठ वही ब्राह्मण है, हो जिसमें तप-त्याग।”
― रश्मिरथी
― रश्मिरथी
“तेजस्वी सम्मान खोजते नहीं गोत्र बतलाके, पाते हैं जग से प्रशस्ति अपना करतब दिखलाके।”
― रश्मिरथी
― रश्मिरथी
“मैं उनका आदर्श, कहीं जो व्यथा न खोल सकेंगे, पूछेगा जग, किन्तु, पिता का नाम न बोल सकेंगे; जिनका निखिल विश्व में कोई कहीं न अपना होगा, मन में लिये उमंग जिन्हें चिर-काल कलपना होगा।”
― रश्मिरथी
― रश्मिरथी
“One of the most valuable lessons I’ve learned is that no one will protect my time or prioritize my needs as vigilantly as me.”
― The Art Of Saying NO: How To Stand Your Ground, Reclaim Your Time And Energy, And Refuse To Be Taken For Granted (Without Feeling Guilty!)
― The Art Of Saying NO: How To Stand Your Ground, Reclaim Your Time And Energy, And Refuse To Be Taken For Granted (Without Feeling Guilty!)
Chinmay’s 2025 Year in Books
Take a look at Chinmay’s Year in Books, including some fun facts about their reading.
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